डीज़ल जनरेटर का खेल खत्म! Loom Solar ने लॉन्च किया 261 kWh पावरहाउस, फैक्ट्रियों को मिलेगा बिना रुके बिजली सपोर्ट

Durgesh Paptwan
Durgesh Paptwan | February 6, 2026
Loom solar launch 261 kwh bess

भारत में सोलर और एनर्जी स्टोरेज सेक्टर तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है और इसी कड़ी में Loom Solar ने एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यानी C&I सेक्टर के लिए 125 kW / 261 kWh क्षमता वाला आधुनिक बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) लॉन्च किया है। यह सिस्टम खास तौर पर उन फैक्ट्रियों और उद्योगों के लिए डिजाइन किया गया है, जहां बिजली की एक सेकंड की रुकावट भी भारी नुकसान का कारण बन सकती है। Loom Solar का यह पावरहाउस डीज़ल जनरेटर का साफ, शांत और भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है, जो बिना शोर और प्रदूषण के लगातार बिजली सपोर्ट देने का दावा करता है।

फैक्ट्रियों के लिए बिना रुके पावर सपोर्ट का नया समाधान

Loom Solar का यह नया BESS सिस्टम उन समस्याओं का समाधान करता है, जिनसे ज्यादातर उद्योग जूझते हैं। आमतौर पर डीज़ल जनरेटर में बिजली कटने के बाद 30 सेकंड से लेकर 3 मिनट तक का स्विच-ओवर टाइम लगता है, जिससे मशीनें रुक जाती हैं और उत्पादन प्रभावित होता है।

Loom Solar का यह बैटरी सिस्टम इंस्टेंट पावर उपलब्ध कराता है, यानी जैसे ही ग्रिड से सप्लाई बंद होती है, वैसे ही बैटरी तुरंत लोड संभाल लेती है। इससे फैक्ट्रियों में प्रोडक्शन लॉस नहीं होता और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बनी रहती है। यह सिस्टम खास तौर पर उन इंडस्ट्रीज के लिए फायदेमंद है, जहां हाई अपटाइम की जरूरत होती है, जैसे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, कोल्ड स्टोरेज, डेटा सेंटर और प्रोसेसिंग प्लांट।

डीज़ल जनरेटर से सस्ता, शांत और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प

Loom Solar का यह 261 kWh BESS न सिर्फ तकनीकी रूप से एडवांस है, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प माना जा रहा है। डीज़ल जनरेटर जहां धुआं, शोर और ईंधन पर निर्भरता बढ़ाते हैं, वहीं यह बैटरी सिस्टम पूरी तरह क्लीन एनर्जी सॉल्यूशन है। कंपनी के अनुसार यह सिस्टम दो घंटे से ज्यादा समय तक लगातार पावर सप्लाई देने में सक्षम है और इसमें डीप डिस्चार्ज कैपेबिलिटी भी मौजूद है।

इसके अलावा इसकी लाइफ साइकल लगभग 6,000 चार्ज-डिस्चार्ज साइकिल तक की बताई जा रही है, जिससे यह लंबे समय तक भरोसेमंद प्रदर्शन करता है। कम मेंटेनेंस, शून्य ईंधन लागत और स्थिर बिजली सपोर्ट इसे डीज़ल जनरेटर के मुकाबले ज्यादा किफायती बनाते हैं।

स्केलेबल टेक्नोलॉजी और माइक्रोग्रिड के लिए तैयार सिस्टम

Loom Solar ने इस BESS को माइक्रोग्रिड एप्लिकेशन को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया है। यह सिस्टम लो-वोल्टेज की समस्या और बार-बार होने वाले पावर कट से निपटने में सक्षम है। खास बात यह है कि इसे जरूरत के हिसाब से 1 MWh तक स्केल किया जा सकता है, यानी बड़े उद्योग अपनी पावर जरूरत के अनुसार इसे अपग्रेड कर सकते हैं।

सोलर पैनल्स के साथ मिलकर यह सिस्टम फैक्ट्रियों को एनर्जी इंडिपेंडेंट बनाने में भी मदद कर सकता है। कुल मिलाकर Loom Solar का यह 261 kWh पावरहाउस भारतीय उद्योगों के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकता है, जो डीज़ल जनरेटर के युग को पीछे छोड़ते हुए स्मार्ट, सस्टेनेबल और भरोसेमंद बिजली समाधान की ओर ले जाता है।

यह भी पढ़े – 👉 PM Surya Ghar योजना को मिली रफ्तार! Tata Power बना भारत का No.1 Rooftop Solar किंग, 10 साल से अजेय

Leave a Comment